छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का अंत, विकास और शांति के नए युग की शुरुआत

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<p>कभी नक्सलवाद का गढ़ माना जाने वाला छत्तीसगढ़ अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। केंद्र और राज्य सरकार के ठोस प्रयासों, सुरक्षाबलों की बहादुरी और स्थानीय लोगों के विश्वास की मदद से छत्तीसगढ़ नक्सलमुक्त हो चुका है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इसी धरती से 31 मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त भारत का संकल्प लिया था. नक्सलवाद के खिलाफ चलाए गए सटीक और बड़े ऑपरेशंस ने नक्सलियों की कमर पूरी तरह तोड़ दी। रणनीतिक घेराबंदी, आधुनिक तकनीक और हथियार, मजबूत खुफिया नेटवर्क और इच्छाशक्ति के दम पर यह सफलता हासिल हुई. पुलिस के लगातार चलाए गए ऑपरेशंस में बड़े नक्सली लीडर भी मारे गए। पुलिस के साथ एनकाउंटर में चलपति, सुधाकर और बसव राजू जैसे टॉप नक्सली लीडर्स के खात्मे ने इसे आसान बनाया. इससे नक्सली संगठन पर नियंत्रण आसान हुआ. साल 2024 से 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ में 533 नक्सली मारे गए, 1975 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 2903 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया. जहां कभी गोलियों की गूंज सुनाई पड़ती थी, वहां अब विकास की रोशनी दस्तक दे रही है। ये बदलाव लोगों के भरोसे की जीत को भी बयां करता है. छत्तीसगढ़ का नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग अब नए दौर में प्रवेश कर चुका है</p>